Let me fly away...
Let me fly away.....
What does little birdie say
In her nest at peep of day?
'Let me fly,' says little birdie,
' Mother, let me fly away.'
'Birdie rest a little longer,
Till the little wings are stronger'
So she rests a little longer,
Then she flies away.
What does little baby say,
In her bed at peep of day?
Baby says, like little birdie,
' Let me rise and fly away.'
Baby, sleep a little longer,
Till the little limbs are stronger,
If she sleeps a little longer,
Baby, too shall fly away?
{ Lord Alfred Tennyson }
यह बाल कविता मेरे नर्सरी कक्षा की पाठ्य-पुस्तक में थी। लगभग पचास साल बाद आज ये पंक्तियां मुझे फिर याद आ रही हैं। मुम्बई अन्तरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के बाहर खड़ी मैं मन ही मन इस कविता को जाने कितनी बार दोहरा चुकी हूँ। निगाह टकटकी लगाये सामने पारदर्शी शीशे के उस पार एक परिचित आकृति का पीछा कर रही है। अभी-अभी मेरी बिटिया अपनी पहली विदेश यात्रा पर निकली है। कुछ ही पलों में उसका विमान उसे मुझसे कई हज़ार मील दूर ले जायेगा। विमान के साथ उसका जीवन भी भविष्य के सुनहरे क्षितिज की ओर पहली उड़ान भरेगा।
मन इन पंक्तियों को दोहरा ज़रूर रहा है लेकिन एक अकुलाहट के साथ। क्या चिड़िया की माँ भी अपने बच्चे को पहली बार पँख फैलाते देख यूँ आकुल होती है? एक ओर मन बिटिया के भविष्य की सुंदर रूपरेखा की कल्पना से आलोड़ित है, वहीं एक कोने में एक सुगबुगाहट...क्या होगा, कैसा होगा! वह एक ऐसे देश में रहने जा रही है जिसके बारे में सिर्फ़ पढ़ा है, तस्वीरों में वहाँ के जीवन की छटा देखी है गये कभी नहीं। नया देश, नया परिवेश, नये लोग,नयी भाषा सभी कुछ नया और नितांत अपरिचित। कैसे रहेगी, क्या ढाल पायेगी स्वयं को उस नये वातावरण में? दिल में प्रश्नों का जमघट है, उसी दिन से जिस दिन यह निश्चित हुआ कि वह मेडिकल की पढ़ाई के लिए विदेश जायेगी, वो भी छः वर्षों के लिए। उसके मन में भी अनबूझे सवालों के बादल घुमड़ते होंगे, लेकिन उमंगों का इंद्रधनुष उन्हें मन में घिरने नहीं देता होगा।
माँ चिड़िया सही वक़्त आने पर ही बच्चों को घोंसले से बाहर आने देती है। उसके बाद विशाल गगन का निर्बाध क्षितिज ही उन पक्षियों का कार्यस्थल होता है।मेरे मन ने भी मुझे यही समझाया।माता-पिता का बच्चों पर सहज विश्वास ही उन बच्चों के पंखों को शक्ति प्रदान करता है। जिस दिन बिटिया का जाना निश्चित हुआ,मानो उसी दिन उसमें परिपक्वता का बीजारोपण हो गया। पिता में भी अपनी बेटी की क्षमता और योग्यता को लेकर नया विश्वास जगा।चूँकि यह तय था कि एक बार हवाई अड्डे के मुख्य द्वार को पार करते ही उसे अपनी सुरक्षा स्वयं ही करनी होगी, उसके पिता ने उसका प्रशिक्षण पासपोर्ट बनाने की प्रक्रिया के साथ ही शुरू कर दिया।जिस दिन वह पासपोर्ट कार्यालय अकेले जाकर औपचारिक कार्यवाही कर आयी, उस दिन मेरे भीतर की असुरक्षित माँ भी थोड़ा आश्वस्त हुई।
परन्तु आज जब सामान की ट्रॉली लिये वह हवाई अड्डे के भीतर दाख़िल हुई मेरे मन के उस असुरक्षित कोने में फिर हलचल हुई। यह पता होते हुए भी कि शीशे के उस पार जाते ही उसके स्वावलंबन की प्रक्रिया आरंभ हो चुकी है,विमान के उड़ान भरने तक हम बाहर बने चबूतरे पर बैठे रहे,चाय के हर घूँट के साथ स्वयं को आश्वस्त करते कि बेटी के नन्हें पँख सुदृढ़ होने लगे हैं।घर लौटने तक यह आश्वासन विश्वास में परिवर्तित हो गया।
देखते ही देखते उसकी सालाना छुट्टियों के दिन आ गए। इस बार उसे पारदर्शी शीशे के दरवाज़े से बाहर आते देखा तो एक अलग ही अनुभूति हुई। ट्रॉली को पकड़े हथेलियों की मुट्ठी में ग़ज़ब का आत्मविश्वास था। वापसी के समय सीधी टिकट न मिल पाने के कारण उसे दो बार विमान बदलकर जाना पड़ा जो उसने सहजता से कर लिया। उससे अगले साल भी वह दो महीने की छुट्टियों में घर आयी।
साल भर से सजे-सँवरे कमरे में सुंदर सा बिखराव आया।हर साल दो महीने के लिए अनछुआ-सा रहने वाला वह कमरा कपड़ों, डीओ,जूते- चप्पलों के बिखराव से सज जाता।
२०२० की छुट्टियों में वो न हो सका। कोरोना के चलते हवाई यातायात अव्यवस्थित हो गयी। फिर आने-जाने में संक्रमित होने का ख़तरा था, आ जाये तो वापसी अनिश्चित! पढ़ाई को अपनी प्राथमिकता बनाते हुए बहुत ही सुलझे हुए तरीके से उसने स्वयं ये फैसला लिया। तब यह सोचा कि अगले साल मिलना होगा ही।किन्तु २०२१ उससे भी बड़ी चुनौती लेकर आया और इस साल भी वीडियो मुलाक़ात ही हुई। तब भी मन को समझाया और तब वे पंक्तियाँ याद आयीं जो माँ ने मुझे होस्टल भेजने से पहले यह कहकर समझायी थी कि विद्यार्थी को घर से दूर जाना ही पड़ता है और मैंने भी यही बात बेटी को समझायी। यथा,
" काक चेष्टा बको ध्यानं, श्वान निद्रा तथैव च।
अल्पहारी गृह त्यागी, विद्यार्थी पंच लक्षणं ।।
अर्थात कौवे की भाँति प्रयत्नशील होना, बगुले की तरह एकाग्रता रखना, कुत्ते की तरह नींद से तुरंत जाग जाना, संयमित भोजन और विद्या ग्रहण करने हेतु घर छोड़कर जाना ,ये विद्यार्थी के पाँच लक्षण हैं। अब समझ में आया कि माँ ने भी तब मुझे समझाने के बहाने ख़ुद को समझाया होगा! बेटी की पहली विदेश यात्रा को चार बरस हो चुके। इस बीच मेरी सेहत,खान-पान और तबियत की पूछताछ वहीं से बराबर होती रहती है। कल तक मेरी बाँहों में झूलने वाली मेरी बिटिया युवती बन चुकी है और जिन बातों के लिये मैं उसे समझाती थी आज उससे मैं समझती हूँ!अब उसे अपनी जगह और स्वयं को माँ की जगह पाती हूँ ।माँ के ज़माने में न फ़ोन था न वीडियो कॉल की सुविधा।माँ की आँखें डाकिये की बाट वैसे ही जोहती होंगी जैसे आज मेरे कान मोबाइल की घन्टी की ....
© भारती बब्बर
Bahut sundar...bahut hi acchha...kamaal ka bhav prastut kiya...keep it up Bharati👏
ReplyDeleteधन्यवाद🙏
Deleteभारती जी, क्या खूब लिखा है I मैं भी इसी अकुलाहट जे अब भी जाती हूँ, जब भी मेरी बेटी छुट्टीया खतम् करके वापस चालू जाती है I
ReplyDeleteबहोत खुबसुरत वर्णन किया है आपने I
लिखती रहे आप, यही शुभ कामना I
धन्यवाद, प्रोत्साहन मिलता रहे तो लिखने की प्रेरणा भी मिलती रहेगी 🙏😊
Deleteबहुत सुंदर लिखा है। चिड़िया तो आश्वस्त हैं कि बच्चे को उड़ना आ गया परन्तु मुझे तो अभी भी वह छुटु लगती है।
ReplyDeleteTennyson की ये कविता मुझे बहुत पसंद है
यूं ही लिखती रहो।
😊 धन्यवाद🙏
DeleteBhut hi bdhiya likha hai poem ko compare karke . Bilkul sahi hai har maa ki mamta bacchon ke liye hamesha jhalakti rahti hai. Hum sbki blessings hmesha hai sbhi bacchon ke liye.
ReplyDeleteGreat Bharti di .keep it up!👍🙏
By - Smita Sharma
Deleteबहुत सुंदर वर्णन है - प्रकृति का नियम और जीवन चक्र। हमने उड़ान भरी, अब बच्चे घोंसला छोड़ निकल पड़े, फिर उनके बच्चे अपना मार्ग अपनाएँगे। सबको उनका गंतव्य स्वयं चुनना है। उम्मीद है हमें हमने उनको सही संस्कृति, मूल्य और दिशा दी है जो भविष्य मैं उनका मार्गदर्शन करेंगे।
ReplyDeleteबहुत आभार बिमल 🙏 हैरानी है कि क्या मैं सचमुच समय पर आभार व्यक्त करने से चूक गयी...!!? क्षमस्व 🙏
DeleteBharati, your usual sensitive, expressive poetic prose. Love it. Brave parent and wonderful writer! Looking forward to more, soon.
ReplyDeleteThanks Jaya 🙏
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ReplyDeleteBhut khub keep it up
ReplyDeleteधन्यवाद 🙏
Deleteसही मनोविश्लेषण!सुंदर शब्दों में🤗😗मदर्स डे पर लिखी मेरी कविता पर तुम्हारी टिप्पणी याद आ गई-"सचमुच माँ ऐसी ही होती है!"अब लिखना छोड़ना मत 😘
ReplyDeleteधन्यवाद नीना 🙏
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