कारगिल विजय दिवस पर...

बाज़ी लगाये जान की सरहद पर मैं खड़ा हूँ
अमन का हूँ सिपाही, वतन का बाँकुरा हूँ

रेत की हो आँधियाँ, या बर्फ की हवायें
समन्दर से भी मेरी हैं सरहद पे निगाहें
हर पल मैं अपनी वर्दी का फर्ज़ निभा रहा हूँ
अमन का हूँ सिपाही, वतन का बाँकुरा हूँ

ना यारी ज़िदगी से, ना  खौफ़ मौत का है
मुझे तो बस जुनून एक तेरी हिफ़ाज़त का है
मैं वतन की मिट्टी का कर्ज़ चुका रहा हूँ
अमन का हूँ सिपाही, वतन का बाँकुरा हूँ

संगीन उठी है मेरी सिर्फ़ तेरी हिफ़ाज़त में
सर झुका है मेरा बस वतन की इबादत में
फिर क्यों मैं तेरे हाथों के पत्थर का निशाना हूँ
अमन का हूँ सिपाही ,वतन का बाँकुरा हूँ

तिरंगे से लिपटी ये सिर्फ़ लाश नहीं है मेरी
बच्चों की बिखरी ख्व़ाहिशों की भी है ये ढेरी
अपनी बीवी के टूटे घरौंदे का एक निशां हूँ
अमन का हूँ सिपाही, वतन का बाँकुरा हूँ

माँ भारती का ये आँचल आसमाँ में ही लहराये
ताबूत से लिपट कर ज़मीं पे ये ना आये
मैं  तिरंगे की इसी शान पर आमादा हूँ
अमन का हूँ सिपाही वतन का बाँकुरा हूँ। 


© भारती बब्बर



Comments

  1. वाह वाह वाह!जय हिंद👍

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  2. A powerful and soulful message in it Bharati. Very well written. Jai Hind🇮🇳

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  3. भारती जी क्या खूब लिखति हैं आप I
    कारगिल दिवस के अवसर पर आपकी यह कविता एक फौजी का आत्मसन्मान और हौसला बढाने मे बहोत कामयाब हो गयी है I आप ऐसे ही लिखती रहें, यही शुभकामना I
    जय हिंद, जय हिंद की सेना 🇮🇳🇮🇳🇮🇳

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    1. 🙏 जय हिंद की सेना 🙏

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  4. Replies
    1. 🙏 जय हिंद... काश आपका नाम जान पाती

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  5. भारती, वाह, वाह। कितना सुंदर लिखा है। और लिखती रहो। जय हिंद

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    1. जय हिंद🙏🙏.... परिचय अज्ञात !

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    2. जय हिंद🙏🙏 मेरेे एक और अज्ञात प्रशंसक 🙏

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  6. Jabardast, what a power in it 🇮🇳🇮🇳

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    1. जय हिंद🙏🙏 काश आपको भी जान सकती!

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  7. Excellent poem .Bhut hi bdhiya Bharti di.
    Jai Hind 🇮🇳

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    1. जय हिंद🙏🙏... पुनःश्च!!!

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    2. Excellent poem Bharti ji.
      Jai Hind 🇮🇳

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      Bharati Babbar

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  8. बहुत सुंदर लिखा है भारती। सचमुच पढ़कर मन रोमांचित हो उठा। यूँही लिखती रहो।

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  9. बहुत खूब भारती!

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