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मोको कहाँ ढूँढे रे बन्दे...

  ईश्वर सृष्टि के कण-कण में व्याप्त है।प्रकृति में विद्यमान हर जीव,हर गतिविधि उसकी उपस्थिति का प्रत्यक्ष प्रमाण है।हमारे वैज्ञानिक तथाकथित वैज्ञानिक तर्क व बुद्धि से हर प्राकृतिक क्रिया का कारण तो खोज लेते हैं लेकिन उस कारण के लिए उत्तरदायी शक्ति के विषय में कुछ भी नहीं कह पाते।हम ये तो जान गये कि हायड्रोजन के दो और ऑक्सीजन का एक अणु मिलकर पानी बनता है लेकिन ये दोनों गैस किसने बनाये?पेड़ पौधों की हरियाली क्लोरोफिल से आती है लेकिन क्लोरोफिल कहाँ से?ऐसे असंख्य प्रश्न हैं जो हमारे आस-पास बिखरे पड़े हैं और जब हम निरुत्तर हो जाते हैं तो हमारी पिपासा हमें मंदिरों, तीर्थों तक ले जाती है।वहाँ जिस भी रूप में उस परम शक्ति का आसन हो,उसके दर्शन से हम तृप्त हो जाते हैं।उस मूर्त रूप के दर्शन का आकर्षण ही हमें बार-बार वहाँ ले जाता है। ऐसा ही एक तीर्थ है माता वैष्णो देवी का भवन जो जम्मू कश्मीर के त्रिकुट पर्वत पर स्थित है।समुद्र तल से इसकी ऊंचाई लगभग पाँच हजार फीट है।सम्पूर्ण देश में, विशेषतः उत्तर भारत में माता वैष्णो देवी की बहुत मान्यता है।शाक्त सम्प्रदाय में वैष्णो देवी को महाकाली, लक्ष्मी तथा स...