मेरी आई
आई....दो अक्षरों का यह एक शब्द मेरे लिए एक वटवृक्ष के उस बीज की तरह है जो अपने भीतर एक विशाल वृक्ष का उद्भव समेटे है।जब तक आई साक्षात थी तब तक ये भान नहीं था क्योंकि तब ये मालूम ही नहीं था कि उसके बिना जीवन कैसा होगा ! आई का जन्म कोंकण महाराष्ट्र के तत्कालीन रत्नागिरी ज़िले ( अब सिंधुदुर्ग ) के वेंगुरला तहसील के उभा दाण्डा गाँव में 1 जुलाई 1936 को हुआ था।उनके पिता श्री गोविंद नारायण गावस्कर गाँव में किराने की दुकान चलाते थे।उनके चार बेटों और दो बेटियों में आई सबसे छोटी थी।आई के सबसे बड़े भाई श्री जयवंत गावस्कर उनसे उन्नीस वर्ष बड़े थे।जब आई नौ बरस की थी उनके पिता का साया सर से उठ गया।तब उन्हीं बड़े भाई ने,जो तब विवाहित थे, पिता का स्थान सहजता से ग्रहण कर लिया।उन्हें सब अण्णा बुलाया करते थे।अपने परिवार के लिए अण्णा हमेशा पितातुल्य ही रहे।मेरे पिता भी उन्हें अपना साला न समझकर श्वसुर का मान दिया करते थे और हमारे लिए वे नाना और मामी नानी की जगह रहे,हालाँकि हमारी नानी तब जीवित थीं।नानी का निधन 1979 में बयासी वर्ष की आयु में हुआ। नाना के असमय निधन के बाद सारा परिवार मुंबई आ गया।आई ने गाँव म...