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हरसिंगार

डॉक्टर के चले जाने के बाद भी आभा देर तक बरामदे में ही बैठी रही।मेज़ पर चाय की जूठी प्यालियों के नीचे मेडिकल रिपोर्ट के पन्ने फड़फड़ाते रहे।कमरे से टीवी चलने की आवाज़ आ रही थी लेकिन आभा के कानों में सिर्फ डॉक्टर के शब्द गूँज रहे थे..." तुम्हें विनय को सम्भालना होगा आभा..." अन्ततः उसका डर सच साबित हो ही गया। आभा ने रिपोर्ट उठाकर लिफाफे में डाली और भीतर आ गयी।विनय भावशून्य-सा टकटकी लगाये टीवी देख रहा था।पल भर आभा को लगा कि वह डॉक्टर के आने के बारे में कुछ पूछेगा लेकिन विनय ने उसकी ओर कोई ध्यान नहीं दिया।विनय की यही चुप्पी उसे खटकने लगी है।डॉक्टर ने आभा से इसकी आदत डाल लेने को कहा है लेकिन लगातार बोलने वाले विनय की यह ख़ामोशी आभा को बहुत परेशान करती है।अब विनय अपनी ओर से कोई बात नहीं करता,आभा कुछ पूछे तब भी कम से कम शब्दों में उत्तर देता है या कभी-कभी कोई प्रतिक्रिया ही नहीं देता।आभा को लगने  लगा है जैसे घर के भीतर विनय और वह अलग-अलग द्वीपों पर रह रहे हैं। विनय की सेवानिवृत्ति के बाद उसने सोचा था कि जीवन की आपाधापी में एकसाथ रह सकने के उन गुमशुदा पलों की भरपायी अब हो सकेगी जो दोनों चा...