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Showing posts from August, 2024

जादू वाला बर्तन

 डिगरी की सुबह से सिट्टीपिट्टी ग़ुम है। उसे कुछ समझ नहीं आ रहा कि अब आगे क्या होगा या हो सकता है। जो कुछ उसने देखा वह जादू से कम नहीं था। वह अभी तक स्वयं को आश्वस्त नहीं कर पा रही कि ऐसा हो सकता है लेकिन आँखों देखी को कैसे झुठला दे ! सचमुच दुनिया में क्या-क्या होता है...वह तो कल्पना में भी वहाँ तक नहीं पहुँच पाती। डिगरी ने ईजा और बाबा को बताया तो सही लेकिन उन्होंने कितना समझा या उसपर कितना भरोसा किया पता नहीं। वह तो तब से खाट पर लेटे-लेटे बस वही सोच रही है। अब तो वह लाल बंगले की ओर जाने का साहस भी नहीं कर सकती। लाल बंगले का असल नाम कुछ और ही है लेकिन उसकी छत सुर्ख लाल रंग की है इसलिए प्रायः सभी उसे लाल बंगला ही कहते हैं। सिर्फ डाकिये को उसका अंग्रेज़ी नाम याद रहता है क्योंकि वह वहाँ अक्सर ही चिट्ठियाँ देने जाता है। वह बंगला किसी सरकारी विभाग के तहत है इसलिए सरकार के बड़े-बड़े अफसर वहाँ रहने आते हैं। हमेशा डिगरी ही सबको दूध देने जाती है, लेकिन अब... उस बंगले में रहने वाला परिवार कहाँ का है वह नहीं जानती। यूँ भी उसे अपने गाँव या घर के अलावा किसी जगह की जानकारी है ही नहीं। वह कभी स्कूल भी...

जलसतह

  उसके स्टेशन पहुँचते ही बूँदाबाँदी शुरू हो गयी।मॉनसून के साथ ही शहर का मूड जैसे बदल गया।सबके चेहरे खिले हुए लगे।एक मॉनसून ही तो बदलता है मुंबई शहर को, अन्यथा दो ही मौसम हैं यहाँ,गर्मी और बहुत गर्मी,सर्दी का नामोनिशान नहीं।अब अगले कई दिनों तक लगातार यही सिलसिला चल सकता है। वह प्लेटफ़ॉर्म नम्बर दो पर जाने के लिए पुल पर चढ़ रही भीड़ के रेले में शामिल हो गयी।उसका पूरा ध्यान सीढ़ियों पर लगा रहा इसलिए उसे अगल-बगल जूते चप्पलों की भीड़ के अतिरिक्त कुछ और नहीं दिखा।प्लेटफॉर्म पर पहुँचने तक बारिश तेज़ हो गयी लेकिन भीड़ की गतिविधि पर कोई असर नहीं पड़ा।लेडीज़ स्पेशल लोकल का समय होने के कारण प्लेटफॉर्म पर महिलाओं की ही भीड़ उमड़ती नज़र आयी।ट्रेन के गुज़रते ही लोगों का इतना ही बड़ा हुजूम फिर आ जायेगा।वह फर्स्ट क्लास के डिब्बे की जगह पर खड़ी हो गयी, तभी गाड़ी की धीमी सरसराहट सुनायी दी।तिरछी पड़ती बारिश की तेज़ बौछारें उसे भिगोती उससे पहले फर्स्ट क्लास का डिब्बा उसके सामने आ गया।वह तेज़ी से चढ़कर खिड़की के पास बैठ गयी।बोरीवली से दादर तक फ़ास्ट लोकल होने के कारण उसे अंधेरी में भी रोज सीट मिल जाती है।उसने चारों ओर निगाह...