दद्दा
दद्दा का सामान वापस आ गया।सामान यानि एक सूटकेस, वी आय पी का सबसे पुराना मॉडल,कत्थई रंग का और बहुत बार घसीटे जाने के कारण जगह-जगह सफ़ेद खरोंचों से भरा हुआ।अंदर का सामान भी गिनाचुना, तीन पैंट कमीज़ें,तीन कुर्ते पायजामे, तीन जोड़ी अंतर्वस्त्र, एक तौलिया और कुछ किताबें।इसके अलावा भी बहुत कुछ था दद्दा के पास जो उनके साथ चला गया या पीछे छूट गया। दद्दा यानि केशव कुमार वर्मा।अपने दोस्तों के लिए केके और परिवार तथा आस पड़ोस में छोटे बड़े सब के दद्दा।सोलह बरस की उम्र तक वे अपने माता पिता की इकलौती सन्तान थे।फिर एक छोटा भाई हुआ जिसका नाम माधव रखा गया लेकिन उनके लिए वह मुन्नु था, जैसे उसके लिए वे दद्दा।पता नहीं कब अम्मा और बाबूजी भी केशव की जगह उन्हें दद्दा बुलाने लगे।तब से वे जगत दद्दा बन गए।दद्दा के लिए भी मुन्नु हमेशा मुन्नु ही रहा, उसकी शादी होने और दो बच्चों का बाप बन जाने के बाद भी। दद्दा ने शादी नहीं की।बाबूजी को लकवा हो जाने से उनकी प्राइवेट नौकरी जाती रही और घर की ज़िम्मेदारी दद्दा ने सम्भाल ली।मुन्नु स्कूल के आखिरी साल में था।विज्ञान में उसकी...