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Showing posts from June, 2022

नागफनी

प्रभा ने खिड़की खोली तभी मेट्रो ट्रेन सामने से धड़धड़ाते हुए निकल गयी।दीवारें एकबारगी हिलती हुई-सी महसूस हुई।बिलकुल आँखों के सामने ही है मेट्रो लाइन, लगता है खिड़की से हाथ निकाल कर उसे छुआ जा सकता है।दिन में जाने कितनी बार धड़धड़ाती है ये,रात साढ़े ग्यारह बजे आखिरी बार गुज़रती है और सुबह छह बजे फिर शुरू हो जाती है।लेकिन प्रभा के विचारों की रेल अनवरत चलती रहती है, सुबह मेट्रो शुरू होने से पहले ही आँख खुलने से लेकर रात आखिरी मेट्रो गुज़र जाने के बाद जबर्दस्ती सो जाने तक। कल वेदांत ने कहा था कि आज आयेगा।समय नहीं बताया लेकिन प्रभा ने सुबह से ही राह देखनी शुरू कर दी।कमाल है न,वह स्वयं से कहती है, अपने ही बेटे से मिलने के लिए उसे कितने दिन इंतज़ार करना पड़ता है!वह भी तभी बताता है जब प्रभा पूछती है कि घर कब आयेगा।न तो उसने कभी खुद कहा, न ही कभी वह बिना बताये आया।बेटी वैदेही पाँच-सात दिन में आकर मिल जाती है।उसी से वेदांत की ख़ैर-ख़बर भी मिल जाती है।प्रभा के पति को जैसे कोई अंतर नहीं पड़ता।बच्चे महीना भर न मिलें तब भी न चिन्ता होती है न उत्सुकता।उनसे प्रभा सारा दिन बात न करे तो भी उन्हें कोई फ़र्क नहीं पड़ता।व...

गुमशुदा की तलाश

 गुमशुदा की तलाश उसने रोज की तरह टीवी लगाया, तभी पीछे से धवल की आवाज़ आयी," लो हो गयी शुरू मम्मी की गुमशुदा की तलाश!" किसी ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी,स्वयं उसने भी नहीं।उसका इस समय पर टीवी लगाना और उसी समय किसी न किसी का टिप्पणी करना नियम ही बन गया है।इसलिए प्रतिक्रिया अपेक्षित भी नहीं है। वह सोफे पर बैठ गयी, पाँव मूढ़े पर फैला कर टिका दिये।वह अब भी दूरदर्शन देखती है!डिश और इंटरनेट के ज़माने में?इस प्रश्न के उत्तर स्वरूप भी प्रतिक्रिया देने के लिए वह बाध्य नहीं रही।नियम की तरह पूछे जाने वाले प्रश्नों पर नियमित उत्तर कब तक दिया जा सकता है!उसे दूरदर्शन के कार्यक्रम और रंग अब भी अच्छे लगते हैं, उद्घोषनाएँ पसंद आती हैं।दूरदर्शन की स्थापना के साथ ही शुरू हुए कुछ कार्यक्रम उसके जीवन का हिस्सा बन गये हैं,जैसे कृषि दर्शन।उसे देखकर वह न जाने किन काल्पनिक गाँवों में घूमती है और ग्रामीण परिवेश का आनंद लेती है।खेती करने के उपायों को सुनकर खेत खलिहानों की कल्पना का सुख वही जानती है।'गुमशुदा की तलाश' कार्यक्रम देखना भी जैसे आदत बन गयी है।शुरू-शुरू में संध्याकालीन सभा आरम्भ होते ही जब ...