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बरगद की कोंपलें

बरगद की कोंपलें  बरगद... इस शब्द से ही इतिहास,स्थायित्त्व, गहराई और धरती से युगीन जुड़ाव का बोध होता है।किस्से-कहानियों में तो 'बूढ़ा बरगद' विशेषण प्रायः उल्लेख में आता है। हम सब के भीतर एक बरगद होता है, जिसकी जड़ें किसी सुदूर गाँव-कस्बे के छोटे-से आँगन में गहरी जुड़ी होती हैं। हम जहाँ-जहाँ जाते हैं वहाँ अपने इतिहास का टुकड़ा साथ ले जाते हैं। फिर व्यक्ति सात समंदर पार क्यों न चला जाए वहाँ भी बरगद की जड़ें अपनी मिट्टी ढूँढ़ लेती हैं।  हमारी एक पारिवारिक मित्र कोसीकलां में  पली-बढ़ी। आज अमेरिका की प्रतिष्ठित डाॅक्टर हैं, पर कोसीकलां के नाममात्र से ही पुलकित होकर वहाँ की यादों की किताब खोलकर बैठ जाती हैं।हममें से कई कोसीकलां का नाम भी न जानते होंगे।वह मथुरा के निकट एक छोटा कस्बा है। अमेरिका की उच्च स्तरीय जीवन शैली कोसीकलां में गहरायी उनकी जड़ें न हिला सकीं। पच्चीस पैसे की फीस  देकर गाँव में पेड़ के नीचे की हुई पढ़ाई की  मीठी-सोंधी   याद अमेरिकी शान  पर आज भी भारी है। मन के बरगद की जड़ें देश-काल की सीमाएँ नहीं जानती। अकसर स्वयं के मन को टटोलकर बरगद ढ...